श्री गणेशाय नमः
श्री मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार जाति के इतिहास के ज्ञान के पूर्व भारतवर्ष में आर्य सभ्यता, उनकी सामाजिक, राजनैतिक, भौगोलिक, तथा आर्थिक, आधार पर विकास और वंशानुक्रम का जानना आवश्यक होगा. इन सभी संकायों का विस्तृत विवेचन इतिहासकारों ने अपने अपने स्तर से अपने अपने ढंग से किया है. इनके द्वारा लिखे गए तथ्य आवश्यक नहीं है कि वर्तमान में जो हमें बताया जां रहा है यथा स्वरूप हो. विश्वं में केवल हमारा देश है जहाँ सबसे पहले सभ्यता का जन्म हुआ है। हमारी संस्कृति सनातन है. संस्कृति अर्थात संस्कारों और विचारधाराओं का गंगा जमनी संगम . संस्कृति के इस पावन प्रवाह में आत्मा, परमात्मा, जगत , समाज और जीवन की हर विधा में आदर्श पुरुषों ने अपनी संस्कृति धारा का सूत्रपात किया है. वस्तुतः सनातन संस्कृति से उपजी भारतीय सभ्यता ने संस्कारों से ओतप्रोत समाज का निर्माण किया. मानव जीवन के सर्वंतोभद्र-सम्यक् प्रवाह और सामाजिक व्यवस्था के लिए वर्नाश्रम धर्म का विवरण सम्पूर्ण विश्व् जानता है. इस वर्ण व्यवस्था का उल्लेख वेदों , शास्त्रों और पुराणों में है. इसे सभी काल के इतिहासकारों ने स्वीकारा है.
क्रमशः .............................
रामनारायण सोनी
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