आदरणीय बंधुओं
मैं आवाहन करता हूँ
सोया पथिक जगाता हूँ
प्रतिभा को मत दफन करो
आगे बढ़ो ओ सृजन करो
मुंदी आँख के सपने छोडो खुले नयन से सपने देखो.
सपनों का पीछा कर देखो सपने मूर्त बना कर देखो.
संकल्पों को कल्प करो निज अतीत का मान करो
तुम वीरों के यस्कर हो अपने पर विश्वास करो
सृजन विकास का मूल सृजन तुम्हारे रक्त बसा
तुम श्रृंगार विधाता हो तुम प्रबुद्ध हो ध्यान करो
तुम्ही बताओ और किसी के बसने की भी धूल बीके
सदियों तक पोषक बन पाए सौ वंशो तक एक कला के
जिन हाथो में कला बसी थी उसमें कलम थमा कर देखो
पिंडों को आकार दिया है अब व्यक्तित्व सजा कर देखो
जंग लगी औजारों में क्यों इस पर जरा विचारो तुम
नवयुग की नवशक्ति धरो अब अपना स्वयं निखारो तुम
तुम अपनी शक्ति भूल रहे तुम भूले किस के वंशज हो
तुमने इतिहास नहीं जाना ना दिव्य पुराणों को माना
ना चारण भाट मिले ऐसे जो खोल सके पोथा पाना
तुम विशुद्ध हो जग प्रसिद्द हो तुमने तुम्हे नहीं जाना
मैंने क्षुद्र प्रयास किया है मित्रों तुम से तुम्हें मिलाने का
शर्तें ..
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मैं आवाहन करता हूँ
सोया पथिक जगाता हूँ
प्रतिभा को मत दफन करो
आगे बढ़ो ओ सृजन करो
मुंदी आँख के सपने छोडो खुले नयन से सपने देखो.
सपनों का पीछा कर देखो सपने मूर्त बना कर देखो.
संकल्पों को कल्प करो निज अतीत का मान करो
तुम वीरों के यस्कर हो अपने पर विश्वास करो
सृजन विकास का मूल सृजन तुम्हारे रक्त बसा
तुम श्रृंगार विधाता हो तुम प्रबुद्ध हो ध्यान करो
तुम्ही बताओ और किसी के बसने की भी धूल बीके
सदियों तक पोषक बन पाए सौ वंशो तक एक कला के
जिन हाथो में कला बसी थी उसमें कलम थमा कर देखो
पिंडों को आकार दिया है अब व्यक्तित्व सजा कर देखो
जंग लगी औजारों में क्यों इस पर जरा विचारो तुम
नवयुग की नवशक्ति धरो अब अपना स्वयं निखारो तुम
तुम अपनी शक्ति भूल रहे तुम भूले किस के वंशज हो
तुमने इतिहास नहीं जाना ना दिव्य पुराणों को माना
ना चारण भाट मिले ऐसे जो खोल सके पोथा पाना
तुम विशुद्ध हो जग प्रसिद्द हो तुमने तुम्हे नहीं जाना
मैंने क्षुद्र प्रयास किया है मित्रों तुम से तुम्हें मिलाने का
वर्णो से ही जाति बनी और जाति बनी व्यसायों से
मैढ़ जाति के क्षत्रीय सब युद्धों के कुशल खिलाड़ी थे
और प्रशासन में पारंगद सब राज काज में सहभागी थे
उनमें से जो कला निपुण थे स्वर्णकार कहलाए
स्वर्णकला जीवन यापन का अविरल उद्योग बनाए
यही हमारा उदय बिंदु था आज सिन्धु बन जाए
मेरी अभिलाषा उज्जवल है चौदह रत्न इसीमें पाएं
चन्द्र वंश के वंशज थे शीर्ष पुरुष अजमीढ हमारे
वंशवृक्ष के मूल हुए हैं आओ गौरव गान संवांरें
उचित समय है आज करें हम मूल्यांकन खुदका ही
क्या हम भूल चुके परिचय सब उनका और अपना भी
इसीलिए करुणा से मेरा ह्रदय भरा जाता है
हमने कभी नहीं क्यों सोचा किन पुरखों से नाता है
जिन हाथो में कला बसी थी उसमें कलम थमा कर देखो
पिंडों को आकार दिया है अब व्यक्तित्व सजा कर देखो
हमने कभी नहीं क्यों सोचा किन पुरखों से नाता है
जिन हाथो में कला बसी थी उसमें कलम थमा कर देखो
पिंडों को आकार दिया है अब व्यक्तित्व सजा कर देखो
श्रीमद्भागवद भगवान का वांग्मय स्वरूप है
समस्त पुराण ऋषियों की पवित्र वाणी है
महाभारत को पांचवां वेद कहा है
इन सब में अध्यात्म के साथ ईश्वर की भक्ति, सगुन निर्गुण की उपासना का विषद वर्णन है. इनमें चन्द्र वंश, सूर्य वंश, महाराज पुरु से लेकर महाराजा अजमीढ और उनके बाद के काल तक का इतिहास लिखा है . इनके सन्दर्भों का हम अलग से विचार करेंगे. मैं इस आलेख के माध्यम से समाज में विद्यमान उत्कृष्ट प्रतिभाओं को आहूत करूँगा की इस में विशिष्ट कार्य कर समाज को और स्वयं को गौरवान्वित करें.
समस्त पुराण ऋषियों की पवित्र वाणी है
महाभारत को पांचवां वेद कहा है
इन सब में अध्यात्म के साथ ईश्वर की भक्ति, सगुन निर्गुण की उपासना का विषद वर्णन है. इनमें चन्द्र वंश, सूर्य वंश, महाराज पुरु से लेकर महाराजा अजमीढ और उनके बाद के काल तक का इतिहास लिखा है . इनके सन्दर्भों का हम अलग से विचार करेंगे. मैं इस आलेख के माध्यम से समाज में विद्यमान उत्कृष्ट प्रतिभाओं को आहूत करूँगा की इस में विशिष्ट कार्य कर समाज को और स्वयं को गौरवान्वित करें.
क्रमशः
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2) रचना के लिए कोई मानदेय प्रदान नहीं किया जावेगा
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