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| · समाज को अपनी आस्थाओं के प्रति दृढ़ बनाना आज की आवश्यकता है। समाज में समरसता निर्माण हो तभी संपूर्ण एकता संभव है। |
| · “विज्ञानं ने अखिल विश्व को सिकोड़कर एक पड़ोस बना दिया है !” इस बात की सत्यता एवं प्रामाणिकता वर्तमान परिदृश्य की भौतिकता के आधुनिक दौर में हुए तकनीकी विकास को देखकर लगाया जा सकता है ! |
| · जातियों के पास ये अधिकार है के वो निर्णयों में भाग लें जो की उनके जीवन और काम की स्थिति को प्रभावित करते हैं |
| · सिर्फ़ भाग लेने के साथ निर्णय लेने की शक्ति ही चिरस्थायी और सृजनात्मक है. |
| · "भागीदारी" एक ऐसा रिश्ता है जिसमे जो पक्षो के बीच सम्मति है उनमे कुछ हद्द तक बराबरी होती है. |
| · आपका काम समाज को निर्भरता से दूर लेजाने का है. |
| · योग्यता विकास के लिए आवश्यक है औरतों, बच्चों और जवानों में बराबर भाग को बढ़ाना . |
| · समाज के पास श्रोत होने चाहिए . योग्यता विकास ऐसे ही श्रोतों से कर सकता है |
| · जागरूकता और योग्यता विकास की भागीदारी ही समाज, गैर सरकारी संस्थाओं और नागरिक प्राधिकारों के बीच ज्यादा समानता कर सकती है |
| · सामाजिक विकास जो की व्यक्तियों के परिश्रम द्वारा योजनाबद्ध है , बड़ी संख्या में समाज से सम्भव है. |
| · सबसे जरुरी है सामाजिक विकास के तत्वों को लगातार देखना |
| · दान ही सामाजिक निर्भरता में मददगार बनाती |
| · सामाजिक विकास एक आवश्यक अभिदान है सारे सामाजिक प्रबंध का. |
रामनारायण सोनी
बहुमूल्य वर्तमान का सदुपयोग कीजिए
वर्तमान बड़ी तेजी से भूत की ओर दौड़ता है। मनुष्य ही नहीं समस्त जीव-जंतु एवं हर चीज एक अंत की ओर गतिमान है। एक बालक जन्म लेता है, विकास करता है, उसकी यह यात्रा एक सम्पूर्णता की ओर ही है। संसार की हर वस्तु का, मनुष्य शरीर का भी निर्माण उन्हीं तत्त्वों से हुआ है, जो हर क्षण अपने में और अपने से बाहर बदलता ही रहता है। उनका चक्र भूत को पीछे छोड़ता हुआ, भविष्य की और आगे बढ़ रहा है। विश्व एक पल के लिए भी ठहरता नहीं। अणु-परमाणु से लेकर विशालकाय ग्रह-पिंड तक अपनी यात्रा गति से कर रहे हैं। यह सब देखते हुए भी हम नहीं सोचते कि क्या वर्तमान का कोई सदुपयोग हो सकता है। जो बीत गया सो गया, जो आने वाला है, वह भविष्य के गर्भ में है। वर्तमान हमारे हाथ में है। यदि हम चाहे तो उसका सदुपयोग करके इस लाभ प्राप्त कर सकते हैं। |
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